सरस्वती की खोज मे-1
घुमने के लिए जरुरी नहीं है कि पहले प्लान बनाया जाये या तैयारी की जाये । अक्सर हमारे आसपास ही बहुत ऐसी जगह है जो घुमक्कड़ी के लिए सर्वश्रेष्ठ है पर हम उनकी तरफ इतना ध्यान नही देते । एक घुमक्कड़ के सोचने का तरीका बिल्कुल अलग होता हैं। उसके लिए सारी जगह अच्छी होती हैं। चाहे वह कोई पर्यटन स्थल हो या कोई अनछुई जगह ....घुमक्कड़ी को शब्द या किसी लेख मे लिखा ही नही जा सकता उसे तो बस महसूस किया जा सकता है ।
अब दिल्ली वालो के लिए लाल किला, इंडिया गेट,कुतुबमीनार उतने मायने नहीं रखते जितने कि दिल्ली से बाहर रहने वाले के लिए रखते है पहाड़ों पर भी यही नियम लागू होता हैं। मेरा मानना है कि घुमक्कड़ी की शुरुआत यही हमारे आस-पास से होती हैं और फिर पहुचते-2 दुसरे शहरों, राज्यों ,देशों तक पहुंच जाती है। शायद ये मेरी शुरुआत है या बस कुछ नहीं।
अरे.... न... न..... नही..... ये आपके लिए नही था ये तो युहीं मन की बाते थी अब मन पे किसी का काबू थोड़े है। ये तो सोचता ही रहता है इसका काम ही सोचना है।
हम मुद्दे पर आते है तो हुआ कुछ यूं कि मै फेसबुक पर काफी मित्रों, लेखकों, घुमक्कड गुरुजनो को फोलो करता हूँ।उनकी पोस्टो को पढता रहता हूँ।एक दिन पोस्ट आई सरस्वती नदी के ऊपर ।उसमें नदी के उद्गम और लुप्त होने के बारे मे बताया गया था।
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Wednesday, 8 November 2017
Monday, 16 October 2017
रेणुका जी झील और चिडियाघर
5 अप्रैल 2017
9 बज गये थे। रास्ते मे ही भूख लगने लगी थी पर रेणुका जी पहुँच के सारी थकान और भूख गायब हो गई ।मंदिर के बाहर बनी फ्री पार्किग मे बाईक रोक दी । मंदिर के बिल्कुल सामने परशुराम तालाब है तब इसमे न के बराबर पानी था और इसमे से गाद निकलवाकर साफ सफाई की जा रही थी इसका जल स्रोत रेणुका झील है रेणुका झील से यह ताल जुडा हुआ है। रेणुका झील का इतिहास ....
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